Showing posts with label Astrology (ज्योतिष). Show all posts
Showing posts with label Astrology (ज्योतिष). Show all posts

Saturday, October 26, 2024

धनतेरस पर कैसे छूटे वास्तुदोष से पीछा - How to come out from the Vaastu Dosh Problem on Dhanteras

धनतेरस पर कैसे छूटे वास्तुदोष से पीछा 
How to come out from the Vaastu Dosh Problem on Dhanteras 

कैसे करें धनतेरस पर भगवान श्री शनिदेव और लक्ष्मी जी की पूजा कि वास्तु दोष का निवारण हो जाए कैसे छूटे वास्तुदोष से हमारा पीछा


धनतेरस कुबेर व लक्ष्मी जी के साथ-साथ वास्तु देवता से भी संबंध रखने वाला पर्व है। यदि घर, व्यापार, प्रतिष्ठान आदि में वास्तु दोष हो तो इस दिन वास्तु पुरुष की पूजा करने से व वास्तु दोष निवारण संबंधी वस्तु घर में लगाने से वास्तु दोष का निवारण होता है। 

वास्तु दोष निवारण के लिए अपनी राशि अनुसार जो विधि मैं बता रहा हूं, अपने घर के पूजा स्थान में मां भगवती का सुंदर तस्वीर या चित्र के साथ-साथ वास्तु यंत्र अवश्य रखें। श्रद्धा भाव से  धनतेरस से लेकर दीवाली तक इन दीपकाें के साथ एक अखंड घी का दीपक भी जलाएं। और हर रोज मां लक्ष्मी की श्रद्धानुसार पंचोपचार पूजन करें और अपने राशि मंत्र के साथ इस मंत्र की तीन माला सुबह- शाम करें। 

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नम:।

यदि विशेष वास्तु दोष है तो वास्तु यंत्र को घर में स्थापित करने के साथ-साथ अपनी राशि की दिशानुसार जमीन में भी एक वास्तु पुरुष यंत्र दबा दें।

अपनी राशि के अनुसार ये उपाय करें।
मेष राशि:- 
1. पूर्व दिशा में आग्नेय कोण में चौमुखा तिल के तेल का एक दीपक जलाएं।
2. घर के पूजा घर में पूर्व दिशा में 108 दानें की लाल मूंगे की माला लटकाएं और इसी पर जाप करें।
3. अपने पूजा घर में इस दिन सुमेरु श्री यंत्र को स्थापित करना लाभकारी रहेगा।
4. पूर्व दिशा में वास्तु यंत्र यंत्र स्थापित करें।
पूजा का समय - शाम 7:00 बजे से लेकर 7:30 बजे के बीच में
पूजा मंत्र:- ऊँ ह्री श्रीं लक्ष्मीनारायण नम:॥

वृषभ राशि:-
1. दक्षिण दिशा में तिल के तेल के सात दीपक जलाएं।
2. घर के ड्राइंग रुम में बैल की सफेद मेटल की मूर्ति रखें।
3. लक्ष्मी यंत्र लगाएं।
4. पष्चिम दिशा में वास्तु यंत्र  स्थापित करें।
5. घर के मुख्य चौखट पर घोड़े की नाल लगाएं।
6. अपने पूजा घर के दक्षिण दिशा में स्फटिक की माला लटकाएं और इसी माला से जाप करें।
पूजा का समय - रात्रि 7:00 से 8:00 तक।
पूजा मंत्र:- ऊँ गोपालाय उत्तर ध्वजाय नम:॥

मिथुन राशि:-
1. पश्चिम दिशा में तिल या सरसों के तेल के ग्यारह दीपक जलाएं।
2. गायत्री मंत्र वाली इलैक्ट्रोनिक साउंड बेल लगाएं। इसे सुबह-शाम दोनों समय चलाएं।
3. गणपति यंत्र लगाएं।
4.  दक्षिण पूर्व दिशा में वास्तु यंत्र व पिरामिड स्थापित करें।
5. अपने पूजा घर में हरे हकीक की 108 दानें की माला पश्चिम दिशा में लटकाएं और इसी पर जाप करें।
पूजा का समय - रात्रि 9:00 से 9:30 मिनट तक।
पूजा मंत्र:- ऊँ क्लीं कृष्णाय नम:॥
 
र्क राशि:-
1. उत्तर दिशा में तिल या सरसों के तेल के चौमुखा चार दीपक जलाएं।
2. घर मेें मछली इक्वेरियम लगाएं।
3. कुबेर यंत्र लगाएं।
y.दक्षिण में वास्तु यंत्र स्थापित करें।
5. घर के मुख्य चौखट के दोनों ओर चांदी का स्वास्तिक लगाएं।
6. घर के पूजा स्थान में उत्तर दिशा में 108 दानें की मोती की माला लटकाएं और इसी पर जाप करें।
पूजा का समय - रात्रि 7:30 से 8:50 तक
पूजा मंत्र:- ऊँ हिरण्य गर्भाय अव्यक्त रूपिणे नम:॥

सिंह राशि:-
1. पूर्व दिशा में तिल या सरसों के तेल के चौमुखा पांच दीपक जलाएं।
2. घर में ताम्रपत्र श्री यंत्र स्थापित करें।
3. अपने पूजा घर में पूर्व दिशा में रुद्राक्ष की माला लटकाएं और इसी पर जाप करें।
4. दक्षिण दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें।
5.घर के मुख्य चौखट पर घोड़े की नाल यू  (Uण) आकार में लगाएं।
पूजा का समय - रात्रि 8:00 से 9:00 मिनट तक।
पूजा मंत्र:- ऊँ क्लीं ब्रह्मणे जगदाधाराय नम:॥

कन्या राशि:-
1. दक्षिण दिशा में तिल या सरसों के तेल में छह दीपक जलाएं।
2. घर में गणपति यंत्र स्थापित करें।
3. घर में लड्डू गोपल की तस्वीर लगाएं।
4. दक्षिण पष्चिम  दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें।
5. अपने पूजा घर में हरे हकीक की 108 दानें की माला पश्चिम दिशा में लटकाएं और इसी पर जाप करें।
पूजा का समय - रात्रि 8:30 से 9:15 मिनट तक।
पूजा मंत्र:- ऊँ नमो पीताम्बराय नम:॥
 
तुला राशि:-
1. पश्चिम दिशा में तिल या सरसों के तेल में ग्यारह चौमुखा दीपक जलाएं।
2. घर में लक्ष्मी यंत्र स्थापित करें।
3. घर में विंडचाइम लगाएं।
4. मंत्र वाली इलैक्ट्रोनिक साउंड बेल भी लगाएं। इसे प्रात:काल व सायंकाल दोनों समय सुविधानुसार चलाएं।
5. पश्चिम दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें।
6. मुख्य दरवाजे की चौखट पर 108 कौड़ियां बंदनवार लटकाएं।
7. अपने पूजा घर के पश्चिम दिशा में स्फटिक की माला लटकाएं और इसी माला से जाप करें।
पूजा का समय - रात्रि 7:15 से 8:15 तक।
पूजा मंत्र:- ऊँ तत्व निरंजनाय तारक्रामाय नम:॥

वृश्चिक राशि:-
1. उत्तर दिशा में तिल या सरसों के तेल के आठ चौमुखा दीपक जलाएं।
2. घर मेें मछली इक्वेरियम लगाएं।
3. तांबे का कुबेर यंत्र लगाएं।
4. पूर्व दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें।
5. 2. घर के पूजा घर में उत्तर दिशा में 108 दानें की लाल मूंगे की माला लटकाएं और इसी पर जाप करें।
पूजा का समय - शाम 7:15 बजे से लेकर 8:00 बजे के बीच में
पूजा मंत्र:- ऊँ नारायण सुरसिंहाय नम:॥

धनु राशि:-
1. पूर्व दिशा में तिल या सरसों के तिल के नौ दीपक जलाएं।
2. घर में अष्ट लक्ष्मी यंत्र स्थापित करें।
3. अपने पूजा घर में पूर्व दिशा में 108 दानें की हल्दी माला लटकाएं और इसी पर जाप करें।
4. उत्तर -पष्चिम दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें।
पूजा का समय - रात्रि 8:15 से 9:15 तक
पूजा मंत्र:- ऊँ श्री कृष्णाय उर्घ्यषंताय नम:॥


मकर राशि:-
1. पश्चिम दिशा में तिल या सरसों के तेल के सात दीपक जलाएं।
2. घर के ड्राइंग रुम में मां सरस्वती वीणा धारण किए हुए तस्वीर रखें।
3. अपने पूजा घर में पारद लक्ष्मी यंत्र स्थापित करें।
4. उत्तर दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें।
5. अपने पूजा घर में पश्चिम दिशा 108 दानें की काले हकीक की माला लटकाएं और इसी पर जाप करें।
पूजा का समय - रात्रि 7:50 से 8:30 तक
पूजा मंत्र:- ऊँ वत्सलाय नम:॥


कुंभ राशि:-
1. पश्चिम दिशा में तिल या सरसों के तेल के ग्यारह दीपक जलाएं।
2. घर के अंदर मंत्र वाली इलैक्ट्रोनिक साउंड बेल लगाएं और इसे प्रात:काल व सायंकाल दोनों समय चलाएं सुविधानुसार।
3. गणपति यंत्र के साथ-साथ पारद कुबेर यंत्र लगाएं।
4. उत्तर दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें।
5. घर में मां शेरावाली की सुंदर तस्वीर लगाएं।
6. अपने पूजा घर में पश्चिम दिशा में 108 दानें की वैयजंती माला लटकाएं और उसी पर जाप करें।
पूजा का समय - रात्रि 7:00 से 8:30 तक
पूजा मंत्र:- ऊँ उपेन्द्राय अच्युताय नम:॥

मीन राशि:-
1. उत्तर दिशा में तिल या सरसों के तेल के बारह दीपक जलाएं।
2. घर मेें मछली इक्वेरियम लगाएं।
3. अपने पूजा घर में संपूर्ण लक्ष्मी यंत्र और आम की लकड़ी का स्वास्तिक स्थापित करें।
4.  उत्तर पूर्व दिशा में वास्तु यंत्र स्थापित करें। 

5. घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ गणपति की सुंदर तस्वीर लगाएं।
6. अपने पूजा घर में उत्तर दिशा में 108 दानें की कमल गट्टे की माला लटकाएं और उसी पर जाप करें।
पूजा का समय - रात्रि 8:15 से 9:15 तक
पूजा मंत्र:- ऊँ क्लीं उध्दृताय उद्धारिणे नम:॥

Monday, August 1, 2011

श्रावण मास : भगवान भोले नाथ की आराधना

राशि अनुसार ऐसे करें श्रावण में भगवान भोले नाथ की आराधना

मेष राशि:- अगर आपके पारिवारिक जीवन में समस्या है, दांपत्य सुख नहीं हैं, आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो श्रावण मास में हर रोज बेलपत्र पर लाल चंदन से नम: शिवाय लिखें। इसी मंत्र का जाप करते हुए जलाभिषेक करें। तत्पश्चात यह बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित कर दें। संपूर्ण कष्टों से छुटकारा मिलेगा।

वृषभ राशि:- वृषभ राशि वाले कार्य सिद्धि व लाभ प्राप्ति के लिए नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत सर्वप्रथम शिवलिंग गंगाजल और दही से अभिषेक करें। उसके बाद कच्चा दूध चढ़ाएं। तत्पश्चात जल की धारा के साथ द्वादश ज्योर्तिलिंगों के मंत्रों का उच्चारण करें। शिवलिंग पर श्वेत चंदन से तिलक करें और हारसिंगार के पुष्प अर्पित करें।

मिथुन राशि:- मिथुन राशि का स्वामी बुध और चंद्रमा के हमेशा आपस बैर रहा है। यदि आपकी जन्मकुंडली में चंद्रमा कमजोर है। आपकी मानसिक अवस्था अस्थिर रहती है। कारोबारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, कारोबार में बचत नहीं हो रही है तो श्रावण महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत हो स्नानोपरांत ऊँ नम: शिवाय का जाप करते हुए गंगाजल में श्रद्धानुसार शहद मिलाकर अभिषेक करें।

कर्क राशि:- कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा जो भगवान शिव का प्रिय श्रृंगार हैं। जीवन में कोई भी समस्या हो उन समस्याओं के निवारण के लिए श्रावण के महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत हो स्नानोपरांत गंगाजल, दूध व मिश्री मिलाकर ऊँ चंद्र मोलेश्वराय नम: इस मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

सिंह राशि:- सिंह राशि वाले लोग शत्रु संबंधी समस्या का निवारण, वर्चस्व प्राप्ति, कारोबार में लाभ प्राप्ति एवं पारिवारिक सुख के लिए श्रावण के महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत श्रद्धानुसार शुद्ध देसी घी से ऊँ  अनंनताय नम: मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव के शिवलिंग पर अभिषेक करें।

कन्या राशि:- कन्या राशि वाले लोग व्यवसाय में हानि से बचने, नौकार में सफलता पाने व पारिवारिक सुख के लिए श्रावण के महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत ऊँ त्रिमूर्तितेय नम: मंत्र का जाप करते हुए दूध, घी और शहद से अभिषेक करें। 

तुला राशि:- तुला राशि वाले लोग दांपत्य सुख, व्यवसाय वृद्धि एवं संतान सुख के लिए श्रावण के महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत दही और गन्ने के रस से शिवलिंग पर ऊँ श्री कंठाय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

वृश्चिक राशि:- वृश्चिक राशि वाले अपनी जीवन की संपूर्ण सफलता के लिए श्रावण के महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत तीर्थ स्थान के जल में दूध और शक्कर मिलाकर ऊँ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ऊं नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

धनु राशि:- धनु राशि वाले मनोवांछित सफलता प्राप्त करने के लिए श्रावण के महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत गंगा जल, कच्चे दूध व केसर मिलाकर ऊँ महेश्वराय नम: इस मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

मकर राशि:- मकर राशि वाले व्यवसाय में सफलता, पारिवारिक जीवन सुख व मनोनुकूल कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए श्रावण के महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत बादाम के तेल से ऊँ सर्वभूतहराय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

कुंभ राशि:- कुंभ राशि वाले लोग परिवार में कष्ट हो, कारोबार में हानि हो, शारिरिक परेशानियों के निवारण हेतु श्रावण के महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत घी, शहद और शक्कर से ऊँ अव्यक्ताय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।

 मीन राशि:- मीन राशि वाले संपूर्ण विघ् और परेशानियों के निवारण के लिए श्रावण के महीने में हर रोज नित्यकर्म से निवृत्त हो स्नानोपरांत कच्चे दूध, केसर और तीर्थ जल मिलाकर ऊँ सर्वलोक प्रजापतये नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।
  

Sunday, July 10, 2011

स्वरशास्त्रानुसार निवास स्थान का चयन

स्वरशास्त्रानुसार निवास स्थान का चयन
 
स्वरशास्त्रानुसार किसी व्यक्ति के निवास के लिये उपयुक्त नगर और उसकी दिशा का चयन करते हैं।
सबसे पहले हम निवास के लिये उपयुक्त नगर के चयन को लेते हैं। नगर का चयन दो प्रकार से किया जाता है।
१॰ नगर और व्यक्ति की नामराशियों से।
२॰ नगर और व्यक्ति की कांकिणी संख्या के अनुसार।

नगर और व्यक्ति की नामराशियों से-
व्यक्ति की नामराशि से नगर की नामराशि १, ३, ४, ६, ७, ८ और १२वीं हो तो इनका फल क्रमशः शत्रुता, हानि, रोग, हानि, शत्रुता, रोग और रोग लिखा है। तथा २, ५, ९, १० और ११ हो तो इसका फल शुभ माना गया है। इसे इस प्रकार भी समझ सकते हैं।

नगर की राशि व्यक्ति की नामराशि
मेष वृष मिथुन कर्क सिंह कन्या तुला वृश्चिक धनु मकर कुम्भ मीन
मेष बैर रोग शुभ शुभ शुभ रोग बैर हानि शुभ रोग हानि शुभ
वृष शुभ बैर रोग शुभ शुभ शुभ रोग बैर हानि शुभ रोग हानि
मिथुन हानि शुभ बैर रोग शुभ शुभ शुभ रोग बैर हानि शुभ रोग
कर्क रोग हानि शुभ बैर रोग शुभ शुभ शुभ रोग बैर हानि शुभ
सिंह शुभ रोग हानि शुभ बैर रोग शुभ शुभ शुभ रोग बैर हानि
कन्या हानि शुभ रोग हानि शुभ बैर रोग शुभ शुभ शुभ रोग बैर
तुला शुभ हानि शुभ रोग हानि शुभ बैर रोग शुभ शुभ शुभ रोग
वृश्चिक रोग बैर हानि शुभ रोग हानि शुभ बैर रोग शुभ शुभ शुभ
धनु शुभ रोग बैर हानि शुभ रोग हानि शुभ बैर रोग शुभ शुभ
मकर शुभ शुभ रोग बैर हानि शुभ रोग हानि शुभ बैर रोग शुभ
कुम्भ शुभ शुभ शुभ रोग बैर हानि शुभ रोग हानि शुभ बैर रोग
मीन रोग शुभ शुभ शुभ रोग बैर हानि शुभ रोग हानि शुभ बैर

उदाहरण- श्री राजवीर सिंह चूरु में रहना चाहते हैं। क्योंकि उनकी नामराशि तुला से चूरु की नामराशि मेष सातवीं राशि है, अतः चूरु उनके लिये ठीक नहीं है। क्योंकि यहां उन्हें रोगग्रस्त रहना हो सकता है।

राशि प्रथमाक्षर
मेष चू चे चो ला ली लू ले लो अ
वृष इ उ इ ए ओ बा बी बु बे बो
मिथुन का की कु घ ङ छु के को हा
कर्क ही हु हे हो डा डी डू डे डो
सिंह मा मी मू मे मो टा टी टू टे
कन्या टो पा पी पू ष ण ठ पे पो
तुला रा री रु रे रो ता ती तू ते
वृश्चिक तो ना नी नू ने नो या यि यू
धनु ये यो भा भी भु धा फा ढ़ा भे
मकर भो जा जी खी खू खे खो गा गी
कुम्भ गू गे गो सा सी सू से सो दा
मीन दी दू थ झ ञ दे दो चा ची

नगर और व्यक्ति की कांकिणी संख्या के अनुसार-
व्यक्ति की वर्गसंख्या को दोगुना कर उसमें नगर की वर्गसंख्या जोड़कर योगफल को आठ से भाग दें। जो शेष बचे वह उस व्यक्ति की कांकिणीसंख्या होगी।

इसी प्रकार नगर की वर्गसंख्या को दोगुना कर उसमें व्यक्ति की वर्गसंख्या जोड़कर योगफल को आठ से भाग दें। जो शेष बचे वह उस नगर की कांकिणीसंख्या होगी।

जिस नगर की कांकिणीसंख्या व्यक्ति की कांकिणीसंख्या से कम हो वह नगर व्यवसाय में लाभ की दृष्टि से उस व्यक्ति के निवास के लिये उपयुक्त होगा, अन्यथा नहीं। यदि नगर और व्यक्ति दोनों की कांकिणीसंख्या समान हो तो, वहां रहने से आय-व्यय बराबर रहता है। व्यक्ति की कांकिणीसंख्या नगर की कांकिणीसंख्या से जितनी अधीक होगी, वह नगर उस व्यक्ति के व्यवसाय के लिये उतना ही अधीक लाभप्रद रहेगा।

वर्ग वर्ग के वर्ण वर्गेश वर्ग संख्या वर्ग की दिशा
अवर्ग अ, इ, उ, ए, ऐ, ओ, औ गरुढ़ पूर्व
कवर्ग क, ख, ग, घ, ङ मार्जार आग्नेय
चवर्ग च, छ, ज, झ, ञ सिंह दक्षिण
टवर्ग ट, ठ, ड, ढ, ण श्वान नैऋत्य
तवर्ग त, थ, द, ध, न सर्प पश्चिम
पवर्ग प, फ, ब, भ, म मूषक वायव्य
यवर्ग य, र, ल, व मृग उत्तर
शवर्ग श, ष, स, ह मेष ईशान

उदाहरण- श्री राजवीर सिंह चूरु में रहना चाहते हैं। राजवीर सिंह की वर्गसंख्या ७ तथा चूरु की ३ है। अतः ७ * २ = १४ + ३ = १७ / ८ शेष बचा १ । यह राजवीर सिंह की कांकिणीसंख्या हुई।
३ * २ = ६ + ७ = १३ / 8 शेष बचे ५ । यह चूरु की कांकिणीसंख्या ५ हुई। अतः राजवीर सिंह की कांकिणीसंख्या चूरु की कांकिणीसंख्या से कम है, इसलिये राजवीर सिंह के लिये चूरु में रहना हानिप्रद है।

नगर का वर्ग कांकिणी व्यक्ति का वर्ग
अवर्ग (१) कवर्ग (२) चवर्ग (3) टवर्ग (4) तवर्ग (5) पवर्ग (6) यवर्ग (7) शवर्ग (8)
अवर्ग (१) व्यक्ति सम 5 लाभ 7 लाभ 1 हानि 3 हानि 5 लाभ 7 लाभ 1 हानि
नगर 4 5 6
7 0 1 2
कवर्ग (२) व्यक्ति 4 हानि 6 सम 0 हानि 2 लाभ 4 लाभ 6 लाभ 0 हानि 2 हानि
नगर 5 6 7 0 1 2 3 4
चवर्ग (3) व्यक्ति 5 हानि 7 लाभ 1 सम 3 लाभ 5 लाभ 7 लाभ 1 हानि 3 हानि
नगर 7 0 1 2 3 4 5 6
टवर्ग (4) व्यक्ति 6 लाभ 0 हानि 2 हानि 4 सम 6 लाभ 0 हानि 2 हानि 4 लाभ
नगर 1 2 3 4 5 6 7 0
तवर्ग (5) व्यक्ति 7 लाभ 1 हानि 3 हानि 5 हानि 7 सम 1 लाभ 3 लाभ 5 लाभ
नगर 3 4 5 6 7 0 1 2
पवर्ग (6) व्यक्ति 0 हानि 2 हानि 4 हानि 6 लाभ 0 हानि 2 सम 4 लाभ 6 लाभ
नगर 5 6 7 0 1 2 3 4
यवर्ग (7) व्यक्ति 1 हानि 3 लाभ 5 लाभ 7 लाभ 1 हानि 3 हानि 5 सम 7 लाभ
नगर 7 0 1 2 3 4 5 6
शवर्ग (8) व्यक्ति 2 लाभ 4 लाभ 6 लाभ 0 हानि 2 हानि 4 हानि 6 हानि 0 सम
नगर 1 2 3 4 5 6 7 0

Wednesday, June 15, 2011

Nav Graha Sampurna Gyan (Jap, Mantra, Yantra, Dhan) - नव ग्रह संपूर्ण ज्ञान


अगर आपको कोई भी ग्रह दोष है और उसके लिए आपको कोई जाप, मंत्र, यन्त्र, तंत्र, दान या अनिय कोई उपचार चाहिए तो इस नव ग्रह चार्ट के हिसाब से करिए आपको तुरंत लाभ होगा.






Note :- You can Download and Can remove the Printout of the above pages in Large Size (Viewable).
अप्प इन चार्ट को डाउनलोड करे प्रिंट आउट को निकाल सकते है.

15 जून 21वीं सदी का अभूतपूर्व और अद्ïभुत चंद्र ग्रहण - Chandra Grahan 2011

15 जून 21वीं सदी का अभूतपूर्व और अद्ïभुत चंद्र ग्रहण
300 साल के बाद 30 दिन में 3 ग्रहण का दुर्लभ संजोग

जून को सूर्य ग्रहण
  15 जून को चंद्र ग्रहण
1 जुलाई पुन: सूर्य ग्रहण
ज्येष्ठï मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का विशेष महत्व
क्योंकि ज्येष्ठïा नक्षत्र, वृश्चिक राशि पर ग्रहण का स्पर्श
मूल नक्षत्र और धनु राशि पर खग्रास चंद्र ग्रहण का समापन
ग्रहण प्रारंभ बुधवार रात्रि 11:53 मिनट पर
खग्रास चंद्र ग्रहण प्रारंभ 12:52 मिनट पर
पूर्ण खग्रास 15 जून रात्रि 1:43 मिनट पर
खग्रास समाप्त 2:33 मिनट पर
ग्रहण की समाप्ति 3:33 मिनट पर

चंद्र ग्रहण कहां-कहां देखा जा सकेगा
भारत, साऊदी अरब, आस्ट्रेलिया, दक्षिणी अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप, मध्य पूर्वी एशिया, दक्षिण-पश्चिम प्रशांत महासागर और उत्तर पूर्व रूस में दिखाई देगा

चंद्र ग्रहण का सूतक विचार
इस ग्रहण का सूतक 15 जून 2011 को दोपहर 2:52 मिनट से प्रारंभ हो जाएगा।

ग्रहण काल तथा बाद मेें करने योग्य कार्य
ग्रहण से पूर्व पवित्र जल से स्नान कर मंत्र जाप, पाठ एवं ध्यान करना अति शुभ रहेगा।
ग्रहण समाप्ति के बाद पुन: पवित्र जल से स्नान अवश्य करना चाहिए।
स्नान के उपरांत ग्रहण समाप्ति के बाद किये गए मंत्रों दशांश, हवन और यज्ञ एवं राशि अनुसार दान अवश्य करें।
15 जून को सूर्यास्त के बाद दान देने योग्य वस्तुओं का संग्रह करके संकल्प कर लेना चाहिए।

कुंभ लग्न में ग्रहण
  • कुंभ लग्न का स्वामी शनि
  • शनि से आठ के आठ ग्रहों का संबंध
  • बृहस्पति का षडाष्टïक संबंध
  • मंगल और केतु का नवम पंचम संबंध
  • सूर्य और बुध का चर्तुदशम संबंध
  • राहु और चंद्रमा का त्रिएकादश संबंध
  • खगोल की अविस्मरणीय घटना
  • साधना, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान के लिए अति अनमोल समय
  • बरसेगा धन
  • मिलेगा आपको मान-सम्मान
  • परिवार में होगा अमन और चैन
  • अपनों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा
  • संतान को मिलेगी सफलता
  • घर आएगी मां-लक्ष्मी
  • ऋण और रोग से मिलेगा छुटकारा
  • दांपत्य सुख में कमी होगी
  • अध्यात्म साधनाओं का मिलेगा लाभ
  • धर्म में बढ़ेगी रूचि
  • बुजुर्गों का मिलेगा आशीर्वाद
  • व्यापार में होगी वृद्घि
  • आर्थिक पक्ष सुदृढ़ होगा।
  • दुर्घटनाओं से पीछा छुटेगा
  • क्योंकि यह चंद्र ग्रहण खास है।
  • पूजा प्रारंभ की समस्त सामग्री सूर्यास्त से पहले ही घर में मंगवाकर रख लें। पूजा सामग्री में कुशा अवश्य रखें।
इस अभूतपूर्व और अविस्मरणीय चंद्र ग्रहण पर द्वादश राशियों के लोग क्या पूजा करें कि संपूर्ण मनोकामना की पूर्ति हो

मेष राशि
किसी लाल कपड़े में बूंदी के आठ लड्डïू बांध लें। इसके पश्चात इस मिठाई वाले कपड़े को अपने सामने रखकर घी का दीपक जला लें तथा वहीें बैठ कर संकट मोचन स्तोत्र का पाठ करें। पाठ के पश्चात गरीब असहाय या गाय को अपने हाथ से लड्डïू खिला दें।

 वृष राशि
 सवा किलो चावल सफेद कपड़े में बांधकर अपने सामने रख लें तथा घी का दीपक जला कर अपने इष्टïदेव का ध्यान करें। उसके बाद पाशुपत स्तोत्र का पाठ करें  इस चावल को पक्षियों को चुगने हेतु डाल दें।

मिथुन राशि
भीगे हुए मूंग 250 ग्राम एवं 11 इलायची अपने सामने रख लें। घी का दीपक जला कर इष्टïदेव का ध्यान करें। इसके पश्चात ú नमो प्रीं पीताम्बराय नम:॥  मंत्र का 108 बार जाप कर इसके साथ ही सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें। यह सामग्री किसी गाय को खिला दें।

कर्क राशि  
कर्क राशि पर ग्रहण होने पर सफेद कपड़े में चावल, मिश्री तथा चाँदी का छोटा सा टुकड़ा या तार रख कर पोटली बना लें। इस पोटली को अपने सामने रखकर घी का दीपक जला लें तथा ú स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सह चन्द्रमसे नम:॥  मंत्र की एक माला जाप करें। मंत्रजाप के पश्चात यह सामग्री किसी शिव मंदिर में या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें।

सिंह राशि
सिंह राशि पर ग्रहण पडऩे से गेहूं, तांबे के पात्र में भरकर उसके ऊपर थोड़ा सा गुड़ एवं लाल चंदन का एक टुकड़ा रख लें। अब सूर्यदेव को प्रणाम कर घी का एक दीपक जला लें। उसके पश्चात ú क्लीं ब्रह्मïणे जगदाधाराय नम:॥  मंत्र का 108 बार जाप करें। मंत्र जाप पूरा होने के बाद किसी जरूरतमंद व्यक्ति को यह सारी सामग्री ताम्रपात्र सहित दान कर दें।

कन्या राशि
गायों को हरा चारा डालें। घी का दीपक जला कर ú ऐं ह्रïीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे॥ मंत्र की एक माला जाप करें।

तुला राशि 
कटोरे में दही लेकर अपने सामने  रख लें। कपूर की टिकिया एवं घी का दीपक जला लें। अपने इष्टïदेव का ध्यान कर महामृत्युंजय मंत्र की एक माला जाप करें। इसके साथ ही एक माला - ú गोपालाय उत्तर ध्वजाय नम:॥ मंत्र का जाप के पश्चात दही से भरा हुआ कटोरा किसी जरूरतमंद को दान कर देें।

वृश्चिक राशि
लाल कपड़े में मसूर की दाल एवं गुड़ बांधकर अपने सामने रख लें तथा घी का दीपक जलाकर अपने इष्टïदेव का ध्यान करे तथा ú ह्रïीं श्रीं लक्ष्मीनारायण नम: मंत्र का 3 माला जाप करे। उसके पश्चात 1 माला सर्व मङ्गïल माङ्गïल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बिके गौरि नारायणी नमोस्तुते॥ मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप पूरा होने के पश्चात यह सम्पूर्ण सामग्री किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें।

धनु राशि
सवा किलो चने की दाल, सवा किलो गुड़ और एक पपीता पीले वस्त्र पर अपने सामने रख दें। घी का दीपक जला दें। बृहस्पति के बीज मंत्र का 11 माला जाप करें। तत्पश्चात यह सामग्री किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें।

मकर राशि
मिट्टïी के कुल्हड़ में सवा किलो मशरुम भर दें। नीले कपड़े से बांध दें। मंगलकारी शनि मंत्र का जाप करें उसके बाद उसे शिव मंदिर में रख आएं।

कुम्भ राशि
सवा पांच किलो उड़द को पीसवाकर लड्डïू बनाकर काले कपड़े में अपने सामने रख दें। तेल का दीपक जलाएं, पांच पाठ दशरथकृत शनि स्तोत्र का करें फिर उन लड्डïूओं को जहाँ मछलियां हो वहाँ डाल दें।

 मीन राशि
11 हल्दी की साबूत गांठ, एक पीला पपीता, स्वेच्छानुसार दक्षिणा पीले कपड़े में अपने सामने रख लें। घी का दीपक जला कर पांच पाठ सिद्ध कुजिका स्तोत्र का करें। तत्पश्चात किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे दें।

ग्रहण के दिन किया जाने वाला अभूतपूर्व, कल्याणकारी तत्क्षण फल देने वाला दान

मेष राशि
लाल चंदन, मसूर की दाल, गुड़, गुड़ वाले परांठे या मीठे चावल और लाल व किसी सज्जन पुरुष या जरूरतमंद को दान देना बहुत ही हितकर होता है। 

वृषभ राशि
घी, दही, कपूर, अदरक, गौदान आदि करने से शुक्रजन्य रोग-व्याधि बाधाएं दूर होती हैं।

मिथुन राशि
बुध से संबधित वस्तुएं, जैसे - हरे कपड़े, हरी सब्जियां, साबूत मूंग, इलायची, हरे पुष्प आदि किसी सज्जन पुरूष को श्रद्धापूर्वक भोजन करवा कर उचित दान-दक्षिणा सहित दें, लाभ मिलेगा।

कर्क राशि
चन्द्रमा की वस्तुओं का दान करें, जैसे - दही, चावल, सफेद व, सफेद चंदन, चीनी आदि का दान दें। अवश्य लाभ मिलेगा।

सिंह राशि
सूर्य से संबंधित दान की वस्तुएं, जैसे - लाल व, गेहूं, लाल चंदन, बछड़े सहित लाल गाय, माणिक्य, तांबे के बर्तन, नारियल एवं लाल फल सहित किसी सुपात्र या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराकर इन वस्तुओं का दान देने से सूर्य के अनुकूल फल की प्राप्ति में सुगमता आती है।

कन्या राशि
बुध से संबधित वस्तुएं, जैसे - हरे कपड़े, हरी सब्जियां, साबूत मूंग, इलायची, हरे पुष्प आदि किसी सज्जन पुरुष को श्रद्धापूर्वक भोजन करवा कर उचित दान-दक्षिणा सहित दें, लाभ मिलेगा।

तुला राशि
घी, दही, कपूर, अदरक, गौदान आदि करने से शुक्रजन्य रोग-व्याधि बाधाएं दूर होती हैं।

वृश्चिक राशि
लाल चंदन, मसूर की दाल, गुड़, गुड़ वाले परांठे या मीठे चावल और लाल व किसी सज्जन पुरुष या जरूरतमंद को दान देना बहुत ही हितकर होता है।

धनु राशि
बृहस्पति की वस्तुएं दान करना हितकारी रहेगा। जैसे पीले चावल, चने की दाल, शहद, पीले व, पपीता, पीले फल, पीले लड्डू और केसर आदि किसी सज्जन पुरूश को दान कर दें, लाभ मिलेगा।

मकर राशि
काले तिल, उड़द, लोहा, तेल, काला वस्त्र, ऊन, कुलथी दान दें। संपूर्ण मनोकामना पूरी होगी

कुंभ राशि
 श्रद्घानुसार जौ, देसी चने, गुड़, नीले पुष्प, जूता, छाता, कस्तूरी आदि श्रद्घानुसार दान करने से लाभ प्राप्त होगा।

मीन राशि
बृहस्पति की वस्तुएं भी दान करना हितकारी रहेगा। शहद, पीले व पपीता, पीले फल, पीले लड्डू और केसर आदि किसी सज्जन पुरूष को दान कर दें, लाभ मिलेगा।