Saturday, 30 October, 2010

Diwali Laxmi pujan Mantra (लक्ष्मी-पूजन मन्त्र)

लक्ष्मी-पूजन मन्त्र

लक्ष्मी-पूजन मन्त्र
“आवो लक्ष्मी बैठो आँगन, रोली तिलक चढ़ाऊँ। गले में हार पहनाऊँ।। बचनों की बाँधी, आवो हमारे पास। पहला वचन श्रीराम का, दूजा वचन ब्रह्मा का, तीजा वचन महादेव का। वचन चूके, तो नर्क पड़े। सकल पञ्च में पाठ करुँ। वरदान नहीं देवे, तो महादेव शक्ति की आन।।”


विधिः- दीपावली की रात्रि को सर्व-प्रथम षोडशोपचार से लक्ष्मी जी का पूजन करें। स्वयं न कर सके, तो किसी कर्म-काण्डी ब्राह्मण से करवा लें। इसके बाद रात्रि में ही उक्त मन्त्र की ५ माला जप करें। इससे वर्ष-समाप्ति तक धन की कमी नहीं होगी और सारा वर्ष सुख तथा उल्लास में बीतेगा।

दिवाली की पुजा एवं महालक्ष्मी की चमत्कारी साधना (Mahalaxmi Upasna, Diwali Puja)


दिवाली की पुजा एवं महालक्ष्मी की चमत्कारी साधना 
(Mahalaxmi Upasna) 




दीपावली के दिन शुभ मुहूर्त में घर या दुकान में की जाती है.
Diwali Laxmi Puja 2010 date is November 5th.  
लक्ष्मी पुजन प्रारंभ करने का समय इस दीपावली मे.(To perform Lakshmi Puja on दीपावली).
प्रदोष काल(Pradosh Kaal) और निशित काल(Nishit kaal) आचा समय है(are very auspicious timings). 
इस दिवाली 2010 मे प्रदोष काल(Pradosh kaal) Lakshmi Puja का समय 6.03 pm से 8.22 pm संध्याकाळ(evening) 5th November 2010 को है.  
निशित काल(Nishit kaal) Lakshmi Puja का समय 8.23 pm से 10.46 pm रात्रि(Night) 5th November 2010 को है.
महानिशिता काल(Mahanishita Kaal) Lakshmi Puja का समय – 11.29 pm on November 5th से 1.51 am November 6th 2010 तक का है.

पूजा की सामग्री :-
  1. अबीर, गुलाल, कुमकुम, चन्दन.
  2. आंबे के लकडे का पाट (Mango Tree Wooden Table) Or (अनिय कोई लकड़े का पाट चलेगा)
  3. आंबे के पते का हार(Door Haar),3 हार माला,250gm फुल, गजरा (वेणी), गुलाब (रोसे), कमल (Lotus), ध्रुवा.
  4. १ गिला नारियल (Coconut), १ सुखा नारियल (गोरा)
  5. रोली, मोली (नाडाछड़ी), चावल (अक्षत, Rice), चावल mix with kumkum.
  6. कपूर, गुंगल धुप साथ मे कुछ काले कॉलसे(Coal), अगरबती, 5 घी(ghee) व तेल(oil) के दीपक.
  7. 5 फल(5 types of fruits), मिठाई, पेडा या हलवा माता को निवेद चाडावा, या माता की पसंदी खीर.
  8. हल्दी(Turmeric Powder).
  9. बताशे, खांड के खिलोने.
  10. Panchamrit पंचाम्रत (Mixture of Milk, Curd, Honey, Sugar, Ghee)
  11. पंचपात्र (Copper Plate),  चमच(Copper Spoon), वाटि (Copper small Bowl). (अगर नहीं हो तो सादे बर्तन भी चलेंगे).
  12. थालियां (Plates / Trays of Stainless steel/plastic) for keeping the Pooja Material
  13. गंगाजल (पानी), अत्तर (Fragrance Perfume Bottle).
  14. संख (Conch).
  15. लाल बलाउस पीस और सफ़ेद कपडा, लाल चुन्दडी या साडी, माताजी के श्रींगार का पेकेट ले, गणेश के वस्त्र ले.
  16. लक्ष्मी व गणेशजी की प्रतिमा (मूर्ति या छवि ले)
  17. ताम्बे का कलश (कलश गंगाजल और पानी से भरा हुआ)
  18. दाब आसन के साथ उन आसन या लाल आसन, लाल या केसरी धोती(अगर स्त्री है तो सीर पर चुन्दडी रखे) 
  19. Gold and/or Silver coin embossed with picture of Goddess Lakshmi, new Currency notes (सोना या चांदी के सिक्के)
  20. Jeweleries - सोना व चांदी(Golden/silver articles) (if available)
  21. Cash Register/Accounts Books, Coins Bag, Pen, Ink Pot (Black, Blue or Red)
  22. जानवे जोड़(Pair of Holy thread)
  23. मिटी के छोटे/बड़े दिया, कापूस(cotton wicks/रुइ), Mustard oil(सरसों के तैल), माचिस(Match Box).




माता लक्ष्मी का प्रिय निवेद के लिये सामग्री (खीर) :-
सामग्री :- 
1 Tea Spoon मध(Honey), 
500gm ढूध(Milk), 
1 Tea Spoon हल्दी(Turmeric Powder), 

250gm चावल(Rice), 
1 केला(Banana), 
50gm पंचमेवा(Dry Fruits), 
केसर(डालना है तो आप सजावट के लिए ड़ाल सकते हो)

नोट :- ये निवेद खास करके दीपावली मे लक्ष्मी पुजन के दिन माता लक्ष्मी के सामने धराते है. वहा ये माताजी की प्रिय निवेद है. गणेशजी को लाडू या मिठाई चडावे.



Vidhi (विधि) / Method of performing पूजा.
विधि :- पूर्व या उत्तर मुख करके पुजा प्रारंभ करे, पूजा प्रारंभ करने से पेले ना धोकर सुद्धा हो जाये, फिर धोती पहन ले, अगर स्त्री है तो अपने माथे (head) पर लाल चुन्दडी रखे, अब अम्बा का पाट लो (कोई भी लकड़े का पाट चलेगा अगर अम्बा का पाट नहीं है तो), उस पर लाल कपडा या बलाउस पीस बिछाओ, लक्ष्मी और गणेशजी की मूर्ति या छवि रखो, लक्ष्मी और गणेशजी को वस्त्र चडावे, हार, फुल, वेणी (गजरा), संगार चडावे. अपना आसन बिछाये पहले दाब का और उसके उप्पर लाल उन का आसन (लाल आसन या अनिय कोई भी आसन चलेगा), आसन पर बेठे. अपने सामने सभी सामग्री रखे, पंचपात्र और गंगाजल, चावल, हल्दी, चांदी का सिका(Coin),५ आसुपाला के पते, श्रीफल, ताम्बे के कलश मे रखे और लक्ष्मी और गणेशजी का ध्यान करते हुए पूजा की विधि प्रारंभ घी और तेल के दीपक को प्रज्वलित करके करे.

नोट:- गूगल का धुप सुबह, संध्या वहा रात्रि को आवसीय करे. अगर ये तीनी समय ना कर सके तो संध्या को अवशिया करे.
 
।। पवित्र करन ।।

पूर्वाभिमुख होकर बेठे, सब से पेले हम "पवित्र करन" इत्यादि मन्त्र से खुद को पवित्र करेंगे. बाया(Left) हाथ में जल ले और दाया(Right) हाथ से इस मंत्र को पड़ते पड़ते अपने सिर तथा शरीर पर छिड़क लें(Sprinkle the water on us).


ॐ अपवित्रः पवित्रो वा, सर्वावस्थांगतोपि वा ।
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥
ॐ पुनातु पुण्डरीकाक्षः पुनातु पुण्डरीकाक्षः पुनातु ।



।। आचमनम ।।
वाणी, मन व अंतःकरण की शुद्धि के लिए चम्मच से साथ बार जल का आचमन करें । हर मंत्र के साथ एक आचमन किया जाए । 
ॐ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा । 
ॐ अमृतापिधानमसि स्वाहा । 
ॐ सत्यं यशः श्रीर्मयि श्रीः श्रयतां स्वाहा ।
ॐ ऐं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।
ॐ ह्रीं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा॥
ॐ क्लीं शिवतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सर्वतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा॥


।। शिखावन्दनम ।। 
शिखा स्पर्श एवं वंदन - शिखा(Head) के स्थान को स्पर्श करते हुए भावना करें कि देवी के इस प्रतीक के माध्यम से सदा सद्विचार ही यहाँ स्थापित रहेंगे । निम्न मंत्र का उच्चारण करें ।  
ॐ चिद्रूपिणि महामाये, दिव्यतेजः समन्विते । 
तिष्ठ देवि शिखामध्ये, तेजोवृद्धिं कुरुष्व मे॥


।।  प्राणायाम: ।। 
श्वास को धीमी गति से गहरी खींचकर रोकना व बाहर निकालना प्राणायाम के क्रम में आता है । श्वास खींचने के साथ भावना करें कि प्राण शक्ति, श्रेष्ठता श्वास के द्वारा अंदर खींची जा रही है, छोड़ते समय यह भावना करें कि हमारे दुर्गुण, दुष्प्रवृत्तियाँ, बुरे विचार प्रश्वास के साथ बाहर निकल रहे हैं । प्राणायाम निम्न मंत्र के उच्चारण के साथ किया जाए ।

ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः, ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम् ।
ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।
ॐ आपोज्योतीरसोऽमृतं, ब्रह्म भूर्भुवः स्वः ॐ ।

 
।। न्यास: ।।
न्यास - इसका प्रयोजन है-शरीर के सभी महत्त्वपूर्ण अंगों में पवित्रता का समावेश तथा अंतः की चेतना को जागृत करना ताकि देव-पूजन जैसा श्रेष्ठ कृत्य किया जा सके । बाएँ (Left) हाथ की हथेली में जल लेकर दाहिने (Right) हाथ की पाँचों उँगलियों को उनमें भिगोकर  निचे बताए गए स्थान पर मंत्रोच्चार के साथ स्पर्श करें ।

ॐ वाङ् मे आस्येऽस्तु । (मुख को)
ॐ नसोर्मे प्राणोऽस्तु । (नासिका के दोनों छिद्रों को)
ॐ अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु । (दोनों नेत्रों को)
ॐ कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु । (दोनों कानों को)
ॐ बाह्वोर्मे बलमस्तु । (दोनों भुजाओं को)
ॐ ऊर्वोमे ओजोऽस्तु । (दोनों जंघाओं को)
ॐ अरिष्टानि मेऽङ्गानि, तनूस्तन्वा मे सह सन्तु । (समस्त शरीर पर)

आत्मशोधन की ब्रह्म संध्या के उपरोक्त पाँचों कृत्यों का भाव यह है कि साधक में पवित्रता एवं प्रखरता की अभिवृद्धि हो तथा मलिनता-अवांछनीयता की निवृत्ति हो । पवित्र-प्रखर व्यक्ति ही भगवान् के दरबार में प्रवेश के अधिकारी होते हैं ।

।। देवी महालक्ष्मी आव्हान ।।  
भावना करें कि साधक की प्रार्थना के अनुरूप माँ लक्ष्मी की शक्ति वहाँ अवतरित हो व स्थापित हो रही है ।
Take flowers or unbroken grains of rice in your hands. Meditate upon the goddess, saying:



या सा पदमा सनसथा विपुला काती ताती पदमा पत्रायत अक्सी
गम भीरा वर्तना भिस्ताना भरना मिटा सुभरा वस्त्रोत्तारिया
या लक्ष्मीर दिव्या रूपा इर्मानी गाना खा सितैह सना पिताहेमा कुम्भ एह 

सा नित्यं पदमा हस्त मामा वास्तु ग्रहे सर्वा मंगल्यायुकता स्वः 

YA SA PADMA SANASTHA VIPULA KATI TATI PADMA PATRAYAT AKSI
GAM BHIRA VARTANA BHISTANA BHARANA MITA SUBHRA VASTROTTARIYA
YA LAKSMIR DIVYA RUPA IRMANI GANA KHA CITAIH SNA PITAHEMA KUMBH AIHSA NITYAM PADMA HASTA MAMA VASATU GRHE SARVA MANGALYAYUKTA SWAHA


Translation - Laksmi who is seated on a lotus, has eyes as wideas lotus petals, massive hips, deep navel, and wears white upperand lower garments, wears jewelry, is bathed from a golden pitcher, carries a lotus in her hand, and is associated with every auspicious sign, let her residein my house.
Drop the flowers and the rice at the feet of the goddess.


।। गणेश ध्यान ।।
भावना करें कि साधक की प्रार्थना के अनुरूप श्री महा गणेशजी की शक्ति वहाँ अवतरित व  स्थापित हो रही है ।
Take flowers or unbroken grains of rice in yourhands. Meditate upon the goddess, saying:

विनायकं हेमावर्षम पशांकुशाधाराम विभुं ध्ययोर गजाननं देवं बाला चन्द्र समप्रभाम
ॐ सहस्र-शीर्षा पुरुषः, सहसराक्शः सहसरपाथ, सह भूमिम विश्वठो वृत्वा त्याथिष्ट-द्धाशान्गुलम
श्री विनायकाय नमः ध्यानात ध्यानं समर्पयामि.

 
Ganesh who is seated on a Rose and is associated with every auspicious sign, let him residein my house.
Drop the flowers and the rice at the feet of the god.

 
।। गुरु ध्यान ।। 
गुरु परमात्मा की दिव्य चेतना का अंश है, जो साधक का मार्गदर्शन करता है । सद्गुरु के रूप में पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीया माताजी का अभिवंदन करते हुए उपासना की सफलता हेतु गुरु आवाहन निम्न मंत्रोच्चारण के साथ करें ।

ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः, गुरुरेव महेश्वरः । गुरुरेव परब्रह्म, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ अखण्डमंडलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम् । तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ ॐ श्रीगुरवे नमः, आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि ।

माँ अम्बा व गुरु सत्ता के आवाहन व नमन के पश्चात् देवपूजन में घनिष्ठता स्थापित करने हेतु पंचोपचार द्वारा पूजन किया जाता है । इन्हें विधिवत् संपन्न करें । जल, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप तथा नैवेद्य प्रतीक के रूप में आराध्य के समक्ष प्रस्तुत किये जाते हैं । एक-एक करके छोटी तश्तरी में इन पाँचों को समर्पित करते चलें । 
 ये पाच वास्तुये देवी माँ के समक्ष रखे 

जल का अर्थ है - नम्रता-सहृदयता ।
अक्षत का अर्थ है - समयदान अंशदान । 
पुष्प का अर्थ है - प्रसन्नता-आंतरिक उल्लास । 
धूप-दीप का अर्थ है - सुगंध व प्रकाश का वितरण, 
पुण्य-परमार्थ तथा नैवेद्य का अर्थ है - स्वभाव व व्यवहार में मधुरता-शालीनता का समावेश ।
ये पाँचों उपचार व्यक्तित्व को सत्प्रवृत्तियों से संपन्न करने के लिए किये जाते हैं । कर्मकाण्ड के पीछे भावना महत्त्वपूर्ण है ।



।। दीपमालिका पूजन ।।
किसी पात्रमें 5, 7, 11, 21 या उससे अधिक दीपों को प्रज्वलित कर महालक्ष्मी MahaLakshmi के समीप रखकर उस दीप-ज्योतिका “ओम दीपावल्यै नमः” इस नाम मंत्रसे गन्धादि उपचारोंद्वारा पूजन कर इस प्रकार प्रार्थना करे-

त्वं ज्योतिस्तवं रविश्चन्दरो विधुदग्निश्च तारकाः |
सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपावल्यै नमो नमः ||

Deepamaalika दीपमालिकाओं का पूजन कर अपने आचार के अनुसार संतरा, ईख, पानीफल, धानका लावा इत्यादि पदार्थ चढाये। धानका लावा (खील) गणेश Ganesha, महालछ्मी MahaLaxmi तथा अन्य सभी देवी देवताओं को भी अर्पित करे। अन्तमें अन्य सभी दीपकों को प्रज्वलित कर सम्पूर्ण गृह अलन्कृइत करे।


।। संकल्प ।।
दाहिने(Right) हाथ में लाल फूल, अक्षत और जल लेकर निम्नांकित रूप से संकल्प करें.
ॐ  विष्णुर्विष्णुर्विष्णु: श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य विन्ष्णुराज्ञ्या प्रवर्तमानश्य. हे देवी जगदम्बा मे भारत के ____________ राज्य(Name of your State) के __________ वासरे(  Name of your city) ______________ गामे(Name of your town) रहता / रहती हु, आज ___________ मासे(Name of all मासे मतलब [त्री, कुर्तिका, भाद्रपद]), के ____________ पक्षे (कृष्ण / शुक्ल) ______________ तिथि (एकं, बिज, एकादशी etc..) ____________ वार (सोमवार, सनिवार etc..) को मे ____________ नामा अहम् (Name of your) ___________ गोत्रौत्पन (Your Gotra Name eg. Kashyab, Haritatsat or Gautam), मे यह संकल्प करता / करती हु __________________________ (आप अपनी इछाये देवी के समक्ष कहो)(Tell your wishes, the purpose for which you are taking this sankalp) लेता / लेती हु. और फिर हाथ मे लिया हुआ जल और फुल महालक्ष्मी और गणेशजी के समक्ष अर्पण करो. इस तरह से आपका संकल्प पूरा हुआ. 

या फिर ये संकल्प भी कर सकते है
।। रदय संकल्प ।।
मैं (अपना नाम बोलें), सुपुत्र श्री (पिता का नाम बोलें), जाति (अपनी जाति बोलें), गोत्र (गोत्र बोलें), पता (अपना पूरा पता बोलें) अपने परिजनो के साथ जीवन को समृध्दि से परिपूर्ण करने वाली माता महालक्ष्मी (MahaLakshmi) की कृपा प्राप्त करने के लिये आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन महालक्ष्मी पूजन कर रहा/रही हूं। हे मां, कृपया मुझे धन, समृध्दि और ऐश्वर्य देने की कृपा करें। मेरे इस पूजन में स्थान देवता, नगर देवता, इष्ट देवता कुल देवता और गुरु देवता सहायक हों तथा मुझें सफलता प्रदान करें।
यह संकल्प पढकर हाथ में लिया हुआ जल, पुष्प और अक्षत आदि श्री गणेश-लछ्मी (Shree Ganesha-Laxmi) के समीप छोड दें।

।। आगे की विधि ।।
संकल्प लेने के बाद देवी का ध्यान करे और इसके बाद एक एक करके गणेशजी (Ganesha), मां लछ्मी (Mata Laxmi), मां सरस्वती (Accounts Books/Register/Baheekhaata), मां काली (Ink Pot Poojan ), धनाधिश कुबेर Lord Kuber(Tijori/Galla), तुला मान की पूजा करें। यथाशक्ती भेंट, नैवैद्य, मुद्रा, वस्तर  आदि अर्पित करें। फिर आपको जो कोई देवी का पाठ(जेसे की लक्ष्मी कवच, लक्ष्मी चालीसा, श्री शुक्तं, श्री लक्ष्मी शुक्तं इत्यादि...) या फिर जाप रुपे कोई भी देवी का मंत्र( श्री महालछ्मयै च विदमहे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लछ्मी प्रचोदयात् ॐ) कर सकते है. हर एक पाठ या एक जाप माला समाप्त होने के बाद समष्क रखे हुए कलश मे फुक मारे और अत्तर(perfume bottel) की एक एक बुंद लक्ष्मी गणेश और कलश पर लगावे. जब आपके पाठ या जाप 11 बार पूर्ण होजाए उसके पश्चात वह पानी से भरा हुआ कलश घर मे रखे हुए पानी के मटके मे ड़ाल दो, और सभी घर के सदसिय उस पानी को पिए, अगर आपको उस जल से अपने घर को भी पवित्र और देवी से रक्षा कवच घर मे करना चाहते है तो अंत मे थोडा जल बचाकर रखे और घर के सभी कोने, दीवारों और दुवार के उमरा पर वो अभिमंत्रित किया हुआ जल छिडके.(Sprinkle the water every where in your home walls and Door's).उसके बाद कलश मे से निकला हुआ सिका और हल्दी का घटिया लेकर घर या दुकान की तिजोरी मे रखे, उसके बाद माता लक्ष्मी और गणेशजी की आरती करे और अंत मे गुंगल धुप करे और पुरे घर या दुकान के सभी सदसियो को वो धुप दे.
नोट:-ये उपासना दीपावली के पाच दिन तक आप कर सकते है अगर आपको चमत्कारी फल प्राप्त करना हो तो. 

।। जप या पाठ करते वक्त क्या ध्यानमे रखे ।।
पाठ या जाप करते समय होठ हिलते रहें, किन्तु आवाज इतनी मंद हो कि पास बैठे व्यक्ति भी सुन न सकें । पाठ या जाप की प्रक्रिया कषाय-कल्मषों-कुसंस्कारों को धोने के लिए की जाती है ।
 
अगर आप पाठ या जाप मे से कोई बी एक क्रिया कर रहे हो, तो वह आपको हर रोज 11 बार पाठ पड़ना(Reading) या जाप की 11  मालाए करनी होंगी.



।। आरती और पुष्पांजलि ।।

गणेश, लक्ष्मी और भगवान जगदीश्वर की आरती Aarati करें। उसके बाद पुष्पान्जलि अर्पित करें, शमा Kshamaa प्रार्थना करें।


।। संकल्प छोड़ने की विधि - विसर्जन ।।
संकल्प छोड़ने के लिए दाया हाथ (Right Hand) मे चावल ले. फिर गणेश एवं महालक्ष्मी प्रतिमाको छोडकर अन्य सभी आवाहित, प्रतिष्ठित एवं पूजित देवताओं को अक्षत छोडते हुए निम्न मंत्रसे विसर्जित करे- 
यान्तु देवगणाः सर्वे पूजमादाया मामकीम् |
इष्टकामसमृध्दयर्थं पुनरागमनाया च ||


छोटा मंत्र:- गछ गछ या देवी/देव तू गच्यान्ति..

अपने भावना अनुसार देवी महालक्ष्मी और गणेशजी की मूर्ति के समक्ष क्षमा याचना करे की अगर मेरे से कोई भूल या कोई टूटी रहगयी हो तो मुझे नादान , नासमाज बालक मानकर क्षमा करे और मेरे परिवार पर सदेव आपकी कृपा दृष्टि बनी रहे.
नोट:-अगर आपको को देवी के मूर्ति मे से प्राण को वापसी नहीं भेजना हो तो देवी की मूर्ति या छवि को लेकर मंदिर मे रखे और फिर अक्षत(Rice) को पाठ पर छोड़ दे.

।। ध्यान केसे करे ।।
मन को ध्यान में नियोजित करना होता है । साकार ध्यान में देवी माँ के अंचल की छाया में बैठने तथा उनका दुलार भरा प्यार अनवरत रूप से प्राप्त होने की भावना की जाती है । निराकार ध्यान में देवी का स्मरण करने से उनके के  स्वर्णिम किरणों को शरीर पर बरसने व शरीर में श्रद्धा-प्रज्ञा-निष्ठा रूपी अनुदान उतरने की भावना की जाती है, जप और ध्यान के समन्वय से ही चित्त एकाग्र होता है और आत्मसत्ता पर उस क्रिया का महत्त्वपूर्ण प्रभाव भी पड़ता है ।

(उपासक)
लिखित,
कलपेश दावे.

Friday, 29 October, 2010

Shree Shuktam - Shri Maha Laxmi Chamatkari Puja in Diwali


Shree Shuktam - Shri (Laxmi) Puja


महा लक्ष्मी की सी पाठ के चमत्कारी प्रयोग से धन, धनिया, और आनीय शुक प्राप्ति  होते है.

सामग्री साथी विधि :-
महालक्ष्मी की छवि या मूर्ति, चुन्दडी और लाल कपडा माता को चडावे, एक गजरा, अत्तर(Attar/perfume), संगार, और मिठाई.
कुछ फुल और १ हर चडावे, लक्ष्मी को कुमकुम का तिलक करे, खीर प्रसादी माता को धरावे, हल्दी का पावडर या घठिया चडावे, धुप, घी और तेल का दीपक करे, लाल आसन पर भेटे और पुजा प्रारंभ करे.
ना धो कर सुधा होकर पुजा प्रारंभ करे.
पुजा प्रारंभ करने का समय :- 5 November 2010 को 6:22Pm से लेकर 1:30Am तक है.
 
श्री  शुक्तं  का पाठ करते समय होठ हिलते रहें, किन्तु आवाज इतनी मंद हो कि पास बैठे व्यक्ति भी सुन न सकें । पाठ की प्रक्रिया कषाय-कल्मषों-कुसंस्कारों को धोने के लिए की जाती है और अकस्मात् धन प्राप्ति के लिए की जाती है ।
श्री शुक्तं का पाठ आपको हर रोज 11 बार पाठ पड़ना(Reading) चाहिए. हर एक बार जब आपका पाठ समाप्त होगा को माता के सम्मुख रखे अत्तर मे से एक बूँद माता लक्ष्मी के छवि या मूर्ति को लगाये और हल्दी के गाठिये को लगावे. इसकी तारा ११ बार अत्तर लगावे और फिर उस हल्दी के गाठिये को आपनी घर की या दुखन की तिजोरी मई रखे और माता की छवि को मंदिर मई रखे. अकस्मात् लाभ होगा. 

  

ENGLISH TRANSLATION OF SRI-SUKTA

Invoke for me, O Agni, the Goddess Lakshmi, who shines like gold, yellow in hue, wearing gold and silver garlands, blooming like the moon, the embodiment of wealth, O Agni! Invoke for me that unfailing Lakshmi, being blessed by whom, I shall win wealth, cattle horses and men.

I Invoke Shri (Lakshmi), who has a line of horses in her front, a series of chariots in the middle, who is being awakened by the trumpeting of elephants, who is divinely resplendent. May that divine Lakshmi grace me. I hereby invoke that Shri (Lakshmi) who is an embodiment of absolute bliss; who is of pleasant smile in her face; whose lustre is like that of burnished gold; who is wet, as it were, (just from the milky ocean) who is blazing with splendour, and is the embodiment of the fulfilment of all wishes; who satisfies the desires of her votaries; who is seated on the lotus and is beautiful like the lotus. I resort to that Lakshmi for shelter in this world, who is beautiful like the moon, who shines bright, who is blazing with renown, who is adored (even) by the gods, who is highly magnanimous, and grand like the lotus; - may my misfortunes perish; I surrender myself to Thee. O, Thou resplendent like the Sun! By Thy power and glory have the plants, (like) the bael tree, have grown up. May the fruits thereof destroy through Thy Grace all inauspiciousness rising from the inner organs and ignorance as well as from the outer senses.


O Lakshmi ! I am born in this country with the heritage of wealth. May the friend of the Lord Siva (Kubera) and Kirti (fame) come to me. May these (having taken their abode with me) bestow on me fame and prosperity. I shall destroy the elder sister to Lakshmi, the embodiment of inauspiciousness and such evil as hunger, thirst, and the like.


O Lakshmi ! Drive out from my abode all misfortune and poverty. I invoke hereby that Lakshmi (Shri), whose (main) avenue of perception is the odoriferous sense (i.e., who abides mainly in cows); who is incapable of defeat or threat from anyone; who is ever healthy (with such virtuous qualities as truth); whose grace is seen abundantly in the refuse of cows (the cows being sacred); and who is supreme over all created beings.

O Lakshmi ! May we obtain and enjoy the fulfilment of our desires and our volitions, the veracity of our speech, the wealth of cattle, the abundance of varieties of food to eat! May prosperity and fame reside in me (thy devotee)! Lakshmi! You have progeny in Kardama. (Hence) O Kardama, may you reside in me. Make Mother Shri with garlands of lotuses to have Her abode in my (ancestral) line.May the (holy) waters create friendship (they being of an adhesive nature). O Chiklita (Progeny of Shri)! Reside at my home; and arrange to make Divine Mother Shri to stay in my lineage !

Invoke for me, O Agni, Lakshmi who shines like gold, is brilliant like the sun, who is powerfully fragrant, who wields the rod of suzerainity, who is of the form of supreme rulership, who is radiant with ornaments and is the goddess of wealth.

Invoke for me, O Agni, the Goddess Lakshmi who shines like gold, blooms like the moon, who is fresh with anointment (of fragrant scent), who is adorned with the lotuses (lifted up by celestial elephants in the act of worship), who is the presiding deity of nourishment, who is yellow in colour, and who wears garlands of lotuses.

Invoke for me O Agni, that Goddess Lakshmi, who is ever unfailing, being blessed by whom I shall win wealth in plenty, cattle, servants, horses, and men.

We Commune ourselves with the Great Goddess, and meditate on the Consort of Vishnu; May that Lakshmi direct us (to the Great Goal). Om May there be Peace, Peace, Peace.


Music And Video of "Shri Suktam and Lakshmi Suktam"




Great Mantras of Ganesha, Laxmi and Kuber - a must on diwali

Great Mantras of Ganesha, Laxmi and Kuber - a must on diwali 

To invoke the blessings of Lord krishna, Ganesha, Maa Laxmi, Maa Durga, Maa Saraswati and God Kuber, chant the following mantras on the eve of Deepavali festival (during night).  


धन समृध्दि यश वैभव सुख शांति प्राप्ति हेतु अनुकूल मंत्र :

Ganesha’s Mantras

|| ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ || 

“Om shree ganneshaay namah Om”


Maa Durga’s Mantras

|| ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ॐ ||

“Om AiN HreeN KleeN Chaamunnddaayai Vichche Om”


Mata Laxmi’s Mantras

ॐ श्री महालक्षमयै च विदमहे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ||

“Om Shree Mahalaxmayai Ch Vidamahe Visshnnu Pat`n`yai Ch Dheemahi tan`no Laxmi Prachodayaat` Om”

|| ॐ ह्रीं अष्टलक्षमयै दारिद्र्य विनाशिनी सर्व सुख समृध्दिं देहि देहि ह्रीं ॐ नमः ||
 
“Om Hrim Asshtalaxmayai Daarid`r`y Vinaashinii Sarv Sukh Samrrdhdim Dehi Dehi Hrim Om Namah”



Lord Krishna’s Mantras
|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ||
“Om Namo Bhagavate Vaasudevaay Namah



Maa Saraswati’s Mantras  
(for students and knowledge seekers)

ॐ सरस्वती मया दृष्टवा, वीणा पुस्तक धारणीम्
हंस वाहिनी समायुक्ता मां विधा दान करोतु में ॐ ||

“Om Sarasvatii Mayaa Drrsshttvaa, Veenna Pustak Dhaaranneem`. haNs Vaahinee Samaayukta MaaN Vidhaa Daan Karotu mem Om”



God Kuber’s Mantras

ॐ कुबेरः त्वम् धनाधीशः गृहे ते कमला स्थिता ।
माम् देवीम् प्रेषयासु त्वम् मद् गृहे ते नमो नमः ॐ ||

“Om Kuber: tvam` Dhanaadheesh: Ghruhe te Kamalaa Sthitaa.
Maam` Deveem` Presshayaasu tvam`, mad` Ghruhe te Namo namah Om”

From,

Kalpesh Dave.

DEEPAVALI (Diwali): Lakshmi Puja on Fri, 5 Nov 2010


DEEPAVALI (Diwali): Lakshmi Puja on Fri, 5 Nov 2010

DEEPAVALI or DIWALI means “a row of lights”. It falls on the last two days of the dark half of Kartik (October-November). For some it is a three-day festival. It commences with the Dhan-Teras, on the 13th day of the dark half of Kartik(hindu month), followed the next day by the Narak Chaudas, the 14th day, and by Deepavali proper on the 15th day.


According to the legends Lakshmi, Goddess of wealth, was incarnated on the new moon day (amaavasyaa) of the Kartik month during the churning of the ocean (samudra-manthan), hence the association of Diwali with Lakshmi. From that day she is worshipped as the symbol of wealth and prosperity. It is also said that on this very day Lord Vishnu rescued Goddess Lakshmi from the prison of Demon king bali and for that reason Goddess Lakshmi is worshipped on the day of Diwali. In Bengal the festival is dedicated to the worship of Kali. It also commemorates that blessed day on which the triumphant Lord Rama returned to Ayodhya after defeating Ravana. On this day also Sri Krishna killed the demon Narakasura.


In South India people take an oil bath in the morning and wear new clothes. They partake of sweetmeats. They light fireworks which are regarded as the effigies of Narakasura who was killed on this day. They greet one another, asking, “Have you had your Ganges bath?” which actually refers to the oil bath that morning as it is regarded as purifying as a bath in the holy Ganges. Everyone forgets and forgives the wrongs done by others. There is an air of freedom, festivity and friendliness everywhere.


This festival brings about unity. It instils charity in the hearts of people. Everyone buys new clothes for the family. Employers, too, purchase new clothes for their employees. Waking up during the Brahmamuhurta (at 4 a.m. ) is a great blessing from the standpoint of health, ethical discipline, efficiency in work and spiritual advancement. It is on Deepavali that everyone wakes up early in the morning. The sages who instituted this custom must have cherished the hope that their descendents would realise its benefits and make it a regular habit in their lives. In a happy mood of great rejoicing village folk move about freely, mixing with one another without any reserve, all enmity being forgotten. People embrace one another with love.


Deepavali is a great unifying force. Those with keen inner spiritual ears will clearly hear the voice of the sages, “O Children of God! unite, and love all”. The vibrations produced by the greetings of love which fill the atmosphere are powerful enough to bring about a change of heart in every man and woman in the world. Alas! That heart has considerably hardened, and only a continuous celebration of Deepavali in our homes can rekindle in us the urgent need of turning away from the ruinous path of hatred.


On this day Hindu merchants in North India open their new account books and pray for success and prosperity during the coming year. The homes are cleaned and decorated by day and illuminated by night with earthern oil-lamps. The best and finest illuminations are to be seen in Bombay and Amritsar. The famous Golden Temple at Amritsar is lit in the evening with thousands of lamps placed all over the steps of the big tank. Vaishnavites celebrate the Govardhan Puja and feed the poor on a large scale.


This year celebrate the Festival of Lights on Friday, 5 November 2010

Thursday, 7 October, 2010

पितृस्तोत्र - Pitru Shanti Stotram

पितृस्तोत्र


 

।।रूचिरूवाच।।

अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्। नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा। तान् नमस्याम्यहं सर्वान् पितृनप्सूदधावपि।।
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा। द्यावापृथिव्योश्च तथा नमस्यामि कृतांजलिः।।
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्। अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येऽहं कृतांजलिः।।
प्रजापतं कश्यपाय सोमाय वरूणाय च। योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृतांजलिः।।
नमो गणेभ्यः सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु। स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे।।
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा। नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम्।।
अग्निरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम्। अग्निषोममयं विश्वं यत एतदशेषतः।।
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्निमूर्तयः। जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिणः।।
तेभ्योऽखिलेभ्यो योगिभ्यः पितृभ्यो यतमानसः। नमो नमो नमस्ते मे प्रसीदन्तु स्वधाभुजः।।


रोग-मुक्ति या आरोग्य-प्राप्ति मन्त्र - Get Dieases free Mantra


रोग-मुक्ति या आरोग्य-प्राप्ति मन्त्र
 
“मां भयात् सर्वतो रक्ष, श्रियं वर्धय सर्वदा। शरीरारोग्यं मे देहि, देव-देव नमोऽस्तु ते।।”
 
 

विधि- ‘दीपावली’ की रात्री या ‘ग्रहण’ के समय उक्त मन्त्र का जितना हो सके, उतना जप करे। कम से कम १० माला जप करे। बाद में एक बर्तन में स्वच्छ जल भरे। जल के ऊपर हाथ रखकर उक्त मन्त्र का ७ या २७ बार जप करे। फिर जप से अभिमन्त्रित जल को रोगी को पिलाए। इस तरह प्रतिदिन करने से रोगी रोग मुक्त हो जाता है। जप विश्वास और शुभ संकल्प-बद्ध होकर करें।


रोग से मुक्ति हेतु-
“ॐ हौं ॐ जूं सः भूर्भुवः स्वः
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षिय मामृतात्
स्वः भूर्भुवः सः जूं ॐ हौं ॐ।।”

 
विधि- शुक्ल पक्ष में सोमवार को रात्रि में सवा नौ बजे के पश्चात् शिवालय में भगवान् शिव का सवा पाव दूध से दुग्धाभिषेक करें। तदुपरान्त उक्त मन्त्र की एक माला जप करें। इसके बाद प्रत्येक सोमवार को उक्त प्रक्रिया दोहरायें तथा दो मुखी रुद्राक्ष को काले धागे में पिरोकर गले में धारण करने से शीघ्र फल प्राप्त होगा।


रोग निवारणार्थ औषधि खाने का मन्त्र
‘‘ॐ नमो महा-विनायकाय अमृतं रक्ष रक्ष, मम फलसिद्धिं देहि, रूद्र-वचनेन स्वाहा’’
 
किसी भी रोग में औषधि को उक्त मन्त्र से अभिमन्त्रित कर लें, तब सेवन करें। औषधि शीघ्र एवं पूर्ण लाभ करेगी।

गणेश शाबर मन्त्र (पाठान्तर सहित) - Ganesh Sabar Mantra

गणेश शाबर मन्त्र (पाठान्तर सहित)



“GANAPAT VEER BHOOKHE MASAAN, JO PHAL MANGOO SO PHAL DET, GANAPAT DEKHE, GAJAPAT DAREY, GANAPAT KE CHHATR SE BADSHAH DAREY, MUKH DEKHE RAJA PRAJA DAREY, HAATA CHADHEY SINDOOR AULIYA GAURI KAA PUTRA, GOOGAL KHEY KAROONGA DHERI, RIDDHI SIDDHI GANAPAT LAYE GHANERI, GIRNAR PATI AUM NAMO SWAHA!!”

“गणपत वीर भूखे मसान, जो फल माँगू सो फल देत, गणपत देखे, गजपत डरे, गणपत के छत्र से बादशाह डरे, मुख देखे राजा-प्रजा डरे, हाथा चढ़े सिन्दूर औलिया गौरी का पुत्र, गूगल खेये करुँगा ढेरी, रिद्धि-सिद्धि गणपत लाये घनेरी, गिरनार पति ॐ नमो स्वाहा”


दुर्गा शाबर मन्त्र

दुर्गा शाबर मन्त्र


“ॐ ह्रीं श्रीं चामुण्डा सिंह वाहिनीं बीस हस्ती भगवती, रत्न मण्डित सोनन की माल। उत्तर पथ में आन बैठी, हाथ सिद्ध वाचा ऋद्धि-सिद्धि। धन-धान्य देहि देहि, कुरू कुरू स्वाहा।”

उक्त मन्त्र का सवा लाख जप कर सिद्ध कर लें। फिर आवश्यकतानुसार श्रद्धा से एक माला जप करने से सभी कार्य सिद्ध होते हैं। लक्ष्मी प्राप्त होती है। नौकरी में उन्नति और व्यवसाय में वृद्धि होती है।

महा-लक्ष्मी मन्त्र

महा-लक्ष्मी मन्त्र

“राम-राम क्ता करे, चीनी मेरा नाम। सर्व-नगरी बस में करुँ, मोहूँ सारा गाँव।
राजा की बकरी करुँ, नगरी करुँ बिलाई। नीचा में ऊँचा करुँ, सिद्ध गोरखनाथ की दुहाई।।”

विधिः- जिस दिन गुरु-पुष्य योग हो, उस दिन से प्रतिदिन एकान्त में बैठ कर कमल-गट्टे की माला से उक्त मन्त्र को १०८ बार जपें। ४० दिनों में यह मन्त्र सिद्ध हो जाता है, फिर नित्य ११ बार जप करते रहें।

लक्ष्मी-पूजन मन्त्र - Maha Laxmi Puja Mantra

लक्ष्मी-पूजन मन्त्र

 “आवो लक्ष्मी बैठो आँगन, रोली तिलक चढ़ाऊँ। गले में हार पहनाऊँ।। बचनों की बाँधी, आवो हमारे पास। पहला वचन श्रीराम का, दूजा वचन ब्रह्मा का, तीजा वचन महादेव का। वचन चूके, तो नर्क पड़े। सकल पञ्च में पाठ करुँ। वरदान नहीं देवे, तो महादेव शक्ति की आन।।”

विधिः- दीपावली की रात्रि को सर्व-प्रथम षोडशोपचार से लक्ष्मी जी का पूजन करें। स्वयं न कर सके, तो किसी कर्म-काण्डी ब्राह्मण से करवा लें। इसके बाद रात्रि में ही उक्त मन्त्र की ५ माला जप करें। इससे वर्ष-समाप्ति तक धन की कमी नहीं होगी और सारा वर्ष सुख तथा उल्लास में बीतेगा।

 

नजर उतारने के उपाय - Nazar Utarane ke upai

यह पोस्ट पूर्व में भी प्रकाशित हो चुकी है। पाठकों के अनुरोध पर परिवर्धित सामग्री के साथ इसे पुनः प्रकाशित किया जा रहा है।


नजर उतारने के उपाय


१॰ बच्चे ने दूध पीना या खाना छोड़ दिया हो, तो रोटी या दूध को बच्चे पर से ‘आठ’ बार उतार के कुत्ते या गाय को खिला दें।

२॰ नमक, राई के दाने, पीली सरसों, मिर्च, पुरानी झाडू का एक टुकड़ा लेकर ‘नजर’ लगे व्यक्ति पर से ‘आठ’ बार उतार कर अग्नि में जला दें। ‘नजर’ लगी होगी, तो मिर्चों की धांस नहीँ आयेगी।

३॰ जिस व्यक्ति पर शंका हो, उसे बुलाकर ‘नजर’ लगे व्यक्ति पर उससे हाथ फिरवाने से लाभ होता है।

४॰ पश्चिमी देशों में नजर लगने की आशंका के चलते ‘टच वुड’ कहकर लकड़ी के फर्नीचर को छू लेता है। ऐसी मान्यता है कि उसे नजर नहीं लगेगी।

५॰ गिरजाघर से पवित्र-जल लाकर पिलाने का भी चलन है।

६॰ इस्लाम धर्म के अनुसार ‘नजर’ वाले पर से ‘अण्डा’ या ‘जानवर की कलेजी’ उतार के ‘बीच चौराहे’ पर रख दें। दरगाह या कब्र से फूल और अगर-बत्ती की राख लाकर ‘नजर’ वाले के सिरहाने रख दें या खिला दें।

७॰ एक लोटे में पानी लेकर उसमें नमक, खड़ी लाल मिर्च डालकर आठ बार उतारे। फिर थाली में दो आकृतियाँ- एक काजल से, दूसरी कुमकुम से बनाए। लोटे का पानी थाली में डाल दें। एक लम्बी काली या लाल रङ्ग की बिन्दी लेकर उसे तेल में भिगोकर ‘नजर’ वाले पर उतार कर उसका एक कोना चिमटे या सँडसी से पकड़ कर नीचे से जला दें। उसे थाली के बीचो-बीच ऊपर रखें। गरम-गरम काला तेल पानी वाली थाली में गिरेगा। यदि नजर लगी होगी तो, छन-छन आवाज आएगी, अन्यथा नहीं।

८॰ एक नींबू लेकर आठ बार उतार कर काट कर फेंक दें।

९॰ चाकू से जमीन पे एक आकृति बनाए। फिर चाकू से ‘नजर’ वाले व्यक्ति पर से एक-एक कर आठ बार उतारता जाए और आठों बार जमीन पर बनी आकृति को काटता जाए।

१०॰ गो-मूत्र पानी में मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पिलाए और उसके आस-पास पानी में मिलाकर छिड़क दें। यदि स्नान करना हो तो थोड़ा स्नान के पानी में भी डाल दें।

११॰ थोड़ी सी राई, नमक, आटा या चोकर और ३, ५ या ७ लाल सूखी मिर्च लेकर, जिसे ‘नजर’ लगी हो, उसके सिर पर सात बार घुमाकर आग में डाल दें। ‘नजर’-दोष होने पर मिर्च जलने की गन्ध नहीं आती।

१२॰ पुराने कपड़े की सात चिन्दियाँ लेकर, सिर पर सात बार घुमाकर आग में जलाने से ‘नजर’ उतर जाती है।

१३॰ झाडू को चूल्हे / गैस की आग में जला कर, चूल्हे / गैस की तरफ पीठ कर के, बच्चे की माता इस जलती झाडू को 7 बार इस तरह स्पर्श कराए कि आग की तपन बच्चे को न लगे। तत्पश्चात् झाडू को अपनी टागों के बीच से निकाल कर बगैर देखे ही, चूल्हे की तरफ फेंक दें। कुछ समय तक झाडू को वहीं पड़ी रहने दें। बच्चे को लगी नजर दूर हो जायेगी।

१४॰ नमक की डली, काला कोयला, डंडी वाली 7 लाल मिर्च, राई के दाने तथा फिटकरी की डली को बच्चे या बड़े पर से 7 बार उबार कर, आग में डालने से सबकी नजर दूर हो जाती है।

१५॰ फिटकरी की डली को, 7 बार बच्चे/बड़े/पशु पर से 7 बार उबार कर आग में डालने से नजर तो दूर होती ही है, नजर लगाने वाले की धुंधली-सी शक्ल भी फिटकरी की डली पर आ जाती है।

१६॰ तेल की बत्ती जला कर, बच्चे/बड़े/पशु पर से 7 बार उबार कर दोहाई बोलते हुए दीवार पर चिपका दें। यदि नजर लगी होगी तो तेल की बत्ती भभक-भभक कर जलेगी। नजर न लगी होने पर शांत हो कर जलेगी।

१७॰ “नमो सत्य आदेश। गुरु का ओम नमो नजर, जहाँ पर-पीर न जानी। बोले छल सो अमृत-बानी। कहे नजर कहाँ से आई ? यहाँ की ठोर ताहि कौन बताई ? कौन जाति तेरी ? कहाँ ठाम ? किसकी बेटी ? कहा तेरा नाम ? कहां से उड़ी, कहां को जाई ? अब ही बस कर ले, तेरी माया तेरी जाए। सुना चित लाए, जैसी होय सुनाऊँ आय। तेलिन-तमोलिन, चूड़ी-चमारी, कायस्थनी, खत-रानी, कुम्हारी, महतरानी, राजा की रानी। जाको दोष, ताही के सिर पड़े। जाहर पीर नजर की रक्षा करे। मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति। फुरो मन्त्र, ईश्वरी वाचा।”
विधि- मन्त्र पढ़ते हुए मोर-पंख से व्यक्ति को सिर से पैर तक झाड़ दें।

१८॰ “वन गुरु इद्यास करु। सात समुद्र सुखे जाती। चाक बाँधूँ, चाकोली बाँधूँ, दृष्ट बाँधूँ। नाम बाँधूँ तर बाल बिरामनाची आनिङ्गा।”


विधि- पहले मन्त्र को सूर्य-ग्रहण या चन्द्र-ग्रहण में सिद्ध करें। फिर प्रयोग हेतु उक्त मन्त्र के यन्त्र को पीपल के पत्ते पर किसी कलम से लिखें। “देवदत्त” के स्थान पर नजर लगे हुए व्यक्ति का नाम लिखें। यन्त्र को हाथ में लेकर उक्त मन्त्र ११ बार जपे। अगर-बत्ती का धुवाँ करे। यन्त्र को काले डोरे से बाँधकर रोगी को दे। रोगी मंगलवार या शुक्रवार को पूर्वाभिमुख होकर ताबीज को गले में धारण करें।

१९॰ “ॐ नमो आदेश। तू ज्या नावे, भूत पले, प्रेत पले, खबीस पले, अरिष्ट पले- सब पले। न पले, तर गुरु की, गोरखनाथ की, बीद याहीं चले। गुरु संगत, मेरी भगत, चले मन्त्र, ईश्वरी वाचा।”
विधि- उक्त मन्त्र से सात बार ‘राख’ को अभिमन्त्रित कर उससे रोगी के कपाल पर टिका लगा दें। नजर उतर जायेगी।

२०॰ “ॐ नमो भगवते श्री पार्श्वनाथाय, ह्रीं धरणेन्द्र-पद्मावती सहिताय। आत्म-चक्षु, प्रेत-चक्षु, पिशाच-चक्षु-सर्व नाशाय, सर्व-ज्वर-नाशाय, त्रायस त्रायस, ह्रीं नाथाय स्वाहा।”
विधि- उक्त जैन मन्त्र को सात बार पढ़कर व्यक्ति को जल पिला दें।

२१॰ “टोना-टोना कहाँ चले? चले बड़ जंगल। बड़े जंगल का करने ? बड़े रुख का पेड़ काटे। बड़े रुख का पेड़ काट के का करबो ? छप्पन छुरी बनाइब। छप्पन छुरी बना के का करबो ? अगवार काटब, पिछवार काटब, नौहर काटब, सासूर काटब, काट-कूट के पंग बहाइबै, तब राजा बली कहाईब।”
विधि- ‘दीपावली’ या ‘ग्रहण’-काल में एक दीपक के सम्मुख उक्त मन्त्र का २१ बार जप करे। फिर आवश्यकता पड़ने पर भभूत से झाड़े, तो नजर-टोना दूर होता है।

२२॰ डाइन या नजर झाड़ने का मन्त्र
“उदना देवी, सुदना गेल। सुदना देवी कहाँ गेल ? केकरे गेल ? सवा सौ लाख विधिया गुन, सिखे गेल। से गुन सिख के का कैले ? भूत के पेट पान कतल कर दैले। मारु लाती, फाटे छाती और फाटे डाइन के छाती। डाइन के गुन हमसे खुले। हमसे न खुले, तो हमरे गुरु से खुले। दुहाई ईश्वर-महादेव, गौरा-पार्वती, नैना-जोगिनी, कामरु-कामाख्या की।”
विधि- किसी को नजर लग गई हो या किसी डाइन ने कुछ कर दिया हो, उस समय वह किसी को पहचानता नहीं है। उस समय उसकी हालत पागल-जैसी हो जाती है। ऐसे समय उक्त मन्त्र को नौ बार हाथ में ‘जल’ लेकर पढ़े। फिर उस जल से छिंटा मारे तथा रोगी को पिलाए। रोगी ठीक हो जाएगा। यह स्वयं-सिद्ध मन्त्र है, केवल माँ पर विश्वास की आवश्यकता है।
२३॰ नजर झारने के मन्त्र
१॰ “हनुमान चलै, अवधेसरिका वृज-वण्डल धूम मचाई। टोना-टमर, डीठि-मूठि सबको खैचि बलाय। दोहाई छत्तीस कोटि देवता की, दोहाई लोना चमारिन की।”


२॰ “वजर-बन्द वजर-बन्द टोना-टमार, डीठि-नजर। दोहाई पीर करीम, दोहाई पीर असरफ की, दोहाई पीर अताफ की, दोहाई पीर पनारु की नीयक मैद।”
विधि- उक्त मन्त्र से ११ बार झारे, तो बालकों को लगी नजर या टोना का दोष दूर होता है।

२४॰ नजर-टोना झारने का मन्त्र
“आकाश बाँधो, पाताल बाँधो, बाँधो आपन काया। तीन डेग की पृथ्वी बाँधो, गुरु जी की दाया। जितना गुनिया गुन भेजे, उतना गुनिया गुन बांधे। टोना टोनमत जादू। दोहाई कौरु कमच्छा के, नोनाऊ चमाइन की। दोहाई ईश्वर गौरा-पार्वती की, ॐ ह्रीं फट् स्वाहा।”
विधि- नमक अभिमन्त्रित कर खिला दे। पशुओं के लिए विशेष फल-दायक है।

२५॰ नजर उतारने का मन्त्र
“ओम नमो आदेश गुरु का। गिरह-बाज नटनी का जाया, चलती बेर कबूतर खाया, पीवे दारु, खाय जो मांस, रोग-दोष को लावे फाँस। कहाँ-कहाँ से लावेगा? गुदगुद में सुद्रावेगा, बोटी-बोटी में से लावेगा, चाम-चाम में से लावेगा, नौ नाड़ी बहत्तर कोठा में से लावेगा, मार-मार बन्दी कर लावेगा। न लावेगा, तो अपनी माता की सेज पर पग रखेगा। मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, फुरो मन्त्र ईश्वरी वाचा।”
विधिः- छोटे बच्चों और सुन्दर स्त्रियों को नजर लग जाती है। उक्त मन्त्र पढ़कर मोर-पंख से झाड़ दें, तो नजर दोष दूर हो जाता है।

२६॰ नजर-टोना झारने का मन्त्र
“कालि देवि, कालि देवि, सेहो देवि, कहाँ गेलि, विजूवन खण्ड गेलि, कि करे गेलि, कोइल काठ काटे गेलि। कोइल काठ काटि कि करति। फलाना का धैल धराएल, कैल कराएल, भेजल भेजायल। डिठ मुठ गुण-वान काटि कटी पानि मस्त करै। दोहाई गौरा पार्वति क, ईश्वर महादेव क, कामरु कमख्या माई इति सीता-राम-लक्ष्मण-नरसिंघनाथ क।”
विधिः- किसी को नजर, टोना आदि संकट होने पर उक्त मन्त्र को पढ़कर कुश से झारे।
नोट :- नजर उतारते समय, सभी प्रयोगों में ऐसा बोलना आवश्यक है कि “इसको बच्चे की, बूढ़े की, स्त्री की, पुरूष की, पशु-पक्षी की, हिन्दू या मुसलमान की, घर वाले की या बाहर वाले की, जिसकी नजर लगी हो, वह इस बत्ती, नमक, राई, कोयले आदि सामान में आ जाए तथा नजर का सताया बच्चा-बूढ़ा ठीक हो जाए। सामग्री आग या बत्ती जला दूंगी या जला दूंगा।´´


कल्पेश दवे